चुनाव 2019: आरक्षण से लेकर स्वास्थ्य तक, कांग्रेस के घोषणा पत्र में ये मुद्दे हो सकते हैं अहम


नई दिल्ली/टीम डिजिटल।कांग्रेस अपने चुनावी घोषणापत्र में स्वास्थ्य सेवा कानून बनाने का वायदा कर सकती है। पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को रायपुर में कहा कि उनकी पार्टी लोकसभा चुनावों के अपने घोषणा पत्र में स्वास्थ्य सेवा कानून के वादे को शामिल करने पर विचार कर रही है ताकि सभी के लिए न्यूनतम स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित कीजा सके। इसके साथ ही अपने चुनावी भाषणों में राहुल गांधी ने कई वादे किए है चलिए जानते है आखिर कांग्रेस अपने घोषणा पत्र में किन वादों में शामिल कर सकती है।


स्वास्थ्य सेवाओं में होंगे ये बदलाव 
डाक्टरों के एक कार्यक्रम में राहुल गांधी कहा, 'हम अपने घोषणापत्र में तीन चीजों पर विचार कर रहे हैं, जिसमें निश्चित न्यूनतम स्वास्थ्य सेवा के लिए स्वास्थ्य सेवा अधिकार कानून, स्वास्थ्यसेवा क्षेत्र में व्यय को देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के तीन प्रतिशत तक बढ़ाने तथा स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों की संख्या बढ़ाना शामिल है।

उनकी पार्टी 2019 के आम चुनावों में सत्ता में आती है तो उसका ध्यान स्वास्थ्य सेवा एवं शिक्षा में व्यय बढ़ाने पर केंद्रित होगा। उन्होंने कहा, 'पहले हमें बेरोजगारी की समस्या से निपटना होगा और दूसरा कम कीमत पर उच्च गुणवत्ता की शिक्षा मुहैया करानी होगी। तीसरा, हमें बेहतर स्वास्थ्य सेवा प्रणाली सुनिश्चित करनी होगी।'

पश्चिमी ओडिशा के बारगढ़ में आयोजित पार्टी की एक रैली में राहुल गांधी ने कहा , 'हमने हमेशा अपने वादों को पूरा किया है। कांग्रेस मोदी की तरह लोगों से झूठे वादे नहीं करती है।' गांधी ने कहा कि चुनावी वादों को पूरा करने का उनकी पार्टी का ट्रैक रिकार्ड छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में देखा जा सकता है जहां पार्टी हाल में सत्ता में आई है। उन्होंने कहा कि इन राज्यों में पार्टी की सरकारें बनते ही किसानों का कर्जा तुरन्त माफ किया गया और छत्तीसगढ़ में धान के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को बढ़ाकर 2,500 रुपये प्रति किविंटल किया गया।

गांधी ने कहा, 'हम इन राज्यों के किसानों को एक संदेश देना चाहते थे कि वे अकेले नहीं है और कांग्रेस उनके साथ है। यही संदेश हम ओडिशा के किसानों को दे रहे है।' चुनाव कार्यक्रम की घोषणा होने के बाद गांधी की ओडिशा की यह पहली यात्रा है।

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