राहुल गांधी नहीं रघुराम राजन लड़ रहे बीजेपी के खिलाफ चुनाव?



नई दिल्ली: सत्ता के गलियारों में चर्चा के बीच कि मोदी सरकार से मनभेद पाल कर देश छोड़कर अमेरिका गए पूर्व रिजर्व बैंक गवर्नर रघुराम राजन राहुल गांधी के 'न्याय' ऐलान के बाद से भारत में हैं. हालांकि देशभ्रमण की उनकी वजह अपनी किताब का अवलोकन है. खासबात है कि एक तरफ बुक रिलीज के लिए आए राजन मीडिया को कह रहे हैं कि यदि देश में नई सरकार बनती है और उन्हें मौका मिलता है तो वह भारत लौटने के लिए तैयार हैं.
वहीं इस बयान के समानांतर कांग्रेस पार्टी न्याय के ऐलान पर उठ रहे सवालों को शांत करने के लिए पूर्व गवर्नर राजन का नाम लिया है. कांग्रेस पार्टी ने दावा किया है कि राहुल गांधी के इस ऐलान से पहले पार्टी रघुराम राजन के संपर्क में है और कांग्रेस के इस न्यूनतम आय योजना के ड्राफ्ट को रघुराम राजन का समर्थन प्राप्त है.
ऐसे में नया सवाल खड़ा होता है कि क्या रघुराम राजन केन्द्र में सत्तारूढ़ बीजेपी सरकार के खिलाफ आगामी चुनाव को पर्दे के पीछे से लड़ रहे हैं? गौरतलब है कि रघुराम राजन को मई 2014 के आम चुनावों से पहले पूर्व की मनमोहन सिंह सरकार ने रिजर्व बैंक का गवर्नर नियुक्त किया था.
चूंकि रिजर्व बैंक के गवर्नर का पद दलगत राजनीति से ऊपर है, मई 2014 के बाद बनी मोदी सरकार के कार्यकाल में रघुराम राजन अपना कार्यकाल पूरा करते हैं. हालांकि मीडिया रिपोर्ट के आधार पर दावा किया गया है कि रघुराम राजन और मोदी सरकार के बीच तनातनी का माहौल रहा है जिसकी अहम वजह राजन द्वारा केन्द्र सरकार की सिफारिशों को नजरअंदाज करना बताया जाता है.
ऐसी स्थिति में दलगत राजनीति के इतर होने के बावजूद रघुराम राजन को केन्द्र सरकार ने दूसरा कार्यकाल नहीं दिया. वह अमेरिका जाने के लिए मजबूर हो गए. अब एक बार फिर देश में लोकसभा चुनाव का बिगुल बजा है. हाल ही में केन्द्र सरकार ने किसान सम्मान निधि योजना का ऐलान करते हुए 75,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया. इसमें 20,000 करोड़ रुपये का प्रावधान केन्द्र सरकार ने अंतरिम बजट में करते हुए जल्द से जल्द किसानों के बैंक खाते में डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर के तहत पैसा देने का रास्ता साफ कर दिया.
हालांकि केन्द्र सरकार के इस कार्यक्रम को वोटर वोटर को लुभाने का तरीका घोषित करते हुए कांग्रेस पार्टी ने फरवरी 2019 में दावा किया कि कांग्रेस अध्यक्ष बहुत जल्द देश से गरीबी हटाने के लिए एक मास्टर प्लान लेकर आने वाले हैं.
अब इस हफ्ते राहुल गांधी का 'न्याय' ऐलान, वैश्विक स्तर पर अर्थशास्त्रियों के समर्थन का दावा, अंतरराष्ट्रीय अर्थशास्त्री के दावे पर सवाल उठना, रघुराम राजन का अपनी किताब दि थर्ड पिलर के लॉन्च के लिए दिल्ली में मौजूद रहना और बुक लॉन्च के मौके पर एक बार फिर भारत सरकार में काम करने की इच्छा जाहिर करना सवाल खड़ा करता है.
क्या मोदी सरकार के खिलाफ इस चुनावी रणभूमि में राहुल गांधी की जगह रघुराम राजन है और क्या राजन पर्दे के पीछे से चुनाव मैदान में हैं?

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