पश्चिम बंगाल: अलीपुरद्वार में चुनावी रैली के दौरान अमित शाह ने की सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश!


भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने शुक्रवार (29 मार्च) को लोकसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार में एक चुनावी सभा को संबोधित कर राज्य में चुनावी अभियान की शुरूआत की। रैली के दौरान बीजेपी अध्यक्ष ने सांप्रदायिक रंग देने की पूरी कोशिश की, हालांकि उन्हें सफलता नहीं मिली। दरअसल, स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमित शाह को सुनने के लिए मुश्किल से करीब 100 से 200 लोग ही मौजूद थे।

स्थानीय संवाददाताओं के अनुसार, शाह की रैली में कुर्सियों की कई पंक्तियां खाली रहीं। शर्मिंदगी से बचने के लिए, बीजेपी के मतदान प्रबंधकों ने यह कोशिश की कि शाह के भाषण के दौरान एक बार भी कैमरा भीड़ की ओर नहीं जा पाए। हालांकि, भाषण के अंत में शाह ने रैली में मौजूद लोगों को खड़े होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए दूसरा कार्यकाल के समर्थन में नारे लगाने के लिए न कहा। यहां भी, कैमरे ने कुछ दर्जनों महिला बीजेपी समर्थकों को हाथ उठाकर और नारे लगाते हुए दिखाया गया फिर हटा लिया गया।
अमित शाह ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरोप लगाया है कि उनकी सरकार ने बंगाल की संस्कृति और सभ्यता को तबाह करने का काम किया है और अब समय आ गया है राज्य की जनता उन्हें उखाड़ फेंके।
आगामी लोकसभा के चुनाव का प्रचार करने आए शाह ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, “आज मैं आप सबसे 2019 के चुनाव के लिए आशीर्वाद मांगने आया हूं। यह 2019 का चुनाव देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह चुनाव तय करने वाला है कि देश किस दिशा में जाएगा। इसके साथ ही बंगाल के लिए यह चुनाव अपने अस्तित्व को बचाने का चुनाव है।”
बीजेपी अध्यक्ष अपने भाषण के दौरान सांप्रदायिक रंग देने के लिए बेताब नजर आए। उन्होंने राज्य की ममता बनर्जी सरकार पर बंगाली को नजरअंदाज कर उर्दू को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। यह बनर्जी की मुस्लिम समर्थक छवि को उजागर करने का एक तुच्छ प्रयास था। उन्होंने बंगाल में रहने वाले हिंदू और बौद्ध शरणार्थियों को अपने भविष्य के बारे में चिंता न करने का आश्वासन दिया। शाह ने कहा कि बीजेपी सरकार पूरी गरिमा के साथ उनके रहने को सुनिश्चित करेगी।
शाह ने तेज-तर्रार भाषण में तृणमूल प्रमुख पर जमकर हमले करते हुए कहा कि पार्टी ने राज्य में लोकतंत्र, राज्य की अस्मिता और संस्कृति को खत्म करने का काम किया है। अब तृणमूल को जमीन से उखाड़ फेंकने का मौका आ गया है।
उन्होंने कहा कि टाेल टैक्स प्रथा से राज्य की जनता त्राहिमाम कर रही है। विधवा पेंशन चाहिए हो या किसान क्रेटिड कार्ड अथवा धान की खरीदी, इन सबके लिए टाेल टैक्स देना होगा। राज्य सरकार इमामों को तो मासिक भत्ता दे रही है लेकिन यह सुविधा पुजारियों को नहीं हैं। स्कूलों में राज्य सरकार उर्दू थोप रही है।
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि बंगाल में लोकतंत्र का गला घोंट दिया गया है। शाह ने कहा कि बंगाल में ममना बनर्जी ने जिस तरह से सरकार चलाई है, उसने राज्य की संस्कृति और सभ्यता को तबाह करने का काम किया है। उन्होंने कहा, “ममता दीदी आपका समय अब खत्म हो चुका है। बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान किसी को पूजा करने से कोई रोकने वाला नहीं होगा।” शाह ने कहा कि ममता जी ईद आने वाली है। बकरे की मां कितने दिन खैर मनाएगी।

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