महागठबंधन के डर से भाग रहे भाजपा नेता, केंद्रीय मंत्री ने यूपी से लड़ने से किया इंकार !


उत्तर प्रदेश की राजनीति गांधी परिवार को खूब रास आती है। रायबरेली से सोनिया गांधी अमेठी से राहुल गांधी चुनाव जीतते आ रहे हैं। वही इंदिरा गांधी की दूसरी बहू मैनका गांधी और उनके बेटे वरुण गांधी भी उत्तर प्रदेश से ही चुनाव लड़ते हैं।इस समय मेनका पीलीभीत से और वरुण सुल्तानपुर से बीजेपी के सांसद हैं।इसी बीच ख़बर आ रही है कि इस बार केन्द्रीय मंत्री मेनका गांधी उत्तर प्रदेश की पीलीभीत सीट से चुनाव लड़ने की इच्छुक नहीं है। सूत्रों के अनुसार इस बारे मे उन्होंने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को बता दिया है।पंजाब केसरी मे छपी खबर के अनुसार,मेनका गांधी ने साफ शब्दों में भाजपा अध्यक्ष को बता दिया है कि उत्तर प्रदेश में नये बने राजनैतिक समीकरण उनके लिए अनुकूल नही है।


भाजपा के सूत्रों का कहना है कि मेनका गांधी ने पिछले सप्ताह पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात के दौरान पीलीभीत के बजाय करनाल से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है।बताया जा रहा है कि अमित शाह ने मेनका से कहा कि उनके अनुरोध पर विचार किया जाएगा।

आपको बता दें कि मेनका गांधी 2014 में पीलीभीत लोकसभा सीट बड़े अंतर से जीती थीं और उनको 52 प्रतिशत वोट मिले थे लेकिन राज्य मे सपा बसपा गठबंधन होने से मेनका गांधी की असली चिंता सुल्तानपुर को लेकर है।सुल्तानपुर से वरुण गांधी सांसद है लेकिन सपा बसपा गठबंधन होने से यहाँ वरुण गांधी के जीतना बहुत मुश्किल हो गया है।
ऐसे में मेनका गाँधी खुद करनाल से चुनाव लड़ने और अपने बेटे वरुण गांधी को पीलीभीत से उतारने की योजना बना रही रही है।हलाकि जानकारो का मानना है कि इस समय पीलीभीत भी बीजेपी के लिए सुरक्षित सीट नहीं है।वही दूसरी और राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने स्पष्ट तौर पर लोकसभा चुनाव लडऩे से इंकार करके भाजपा की चिंता बढ़ा दी है।अमित शाह के निवेदन पर वसुंधरा राजे ने कहा कि वो केंद्र की राजनीति में नही जाना चाहती है वो राज्य की राजनीति में ही रहेंगी। साथ ही उन्होंने अमित शाह को एक संदेश भेजा है कि यह आप पर निर्भर है कि उनके बेटे दुष्यंत को लोकसभा का टिकट दें या न दें मगर वह जयपुर से बाहर नहीं जाएंगी।

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