इसलिए कोहली की स्टार टीम न्यूज़ीलैंड से हार गई? जाने कारण

न्यूज़ीलैंड में क्रिकेट नहीं बल्कि शीर्ष पर रग्बी है. रग्बी यहां क्रिकेट की तुलना में ज़्यादा पैसा, प्रतिभा और लोगों के ध्यान आकर्षित करता है. दूसरी तरफ़ भारत की आबादी लगभग एक अरब 30 करोड़ है और क्रिकेट की दुनिया में भारत का दबदबा है.
भारत के पास खिलाड़ियों के चयन के ज़्यादा विकल्प हैं. बेशुमार पैसे और ताक़त है और वनडे क्रिकेट में नंबर वन है. जब न्यूज़ीलैंड ने भारत को हराया तो ऐसा लगा कि मामला कितना एकतरफ़ा था और भारत न्यूज़ीलैंड को टक्कर देने की स्थिति में कहीं से भी नहीं था.
भारत के पास स्टार्स हैं और न्यूज़ीलैंड के पास टीम. भारतीय टीम के बैकरूम स्टाफ़ किसी भी कॉर्पोरेट प्रोफ़ेशनल से ज़्यादा पैसे कमाते हैं दूसरी तरफ़ न्यूज़ीलैंड के पास फ़िज़ूलख़र्ची के लिए इतने पैसे नहीं हैं. भारत के पास दुनिया के बेहतरीन बल्लेबाज़ हैं.

क्या भारत ने न्यूज़ीलैंड को हल्के में लिया?
भारतीय प्रशंसकों और मीडिया के साथ कमेंट्री बॉक्स में अंधराष्ट्रवादी अंदाज़ में तारीफ़ करने वालों ने ऐसा ज़रूर किया है. लेकिन खिलाड़ियों ने इसे कैसे लिया? जब पहले दिन बारिश के कारण मैच रुका तब न्यूज़ीलैंड ने पाँच विकेट के नुक़सान पर 211 रन बनाए थे.

बारिश के कारण बाक़ी का मैच अगले दिन यानी बुधवार को हुआ. अगले दिन न्यूज़ीलैंड ने 23 गेंद पर 28 रन बनाए. इसे देख भारत को शायद लगा कि बल्लेबाज़ी आसान होगी. आख़िरकार भारत को कमज़ोर मध्यक्रम की क़ीमत चुकानी पड़ी. जडेजा को लेकर भारतीय टीम के प्रबंधन ने अनिश्चितता बनाई रखी.

यह वो मैच है जिसे न्यूज़ीलैंड ने जीता है न कि भारत हारा है. विलियम्सन ने विकेट का आकलन बिल्कुल सटीक किया और इस चीज़ को समझा कि बैटिंग में नई कोशिश और प्रयोग से कतराने का कोई मतलब नहीं है.

हालांकि 240 का स्कोर भारत के लिए कोई बड़ा स्कोर नहीं था. न्यूज़ीलैंड ने तेज़ गेंदबाज़ मैट हेनरी और ट्रेंट बॉल्ट की गेंदबाज़ी से सुनिश्चित कर दिया किया 240 का स्कोर कोई आसान स्कोर नहीं है.

इनके साथ लेफ्ट आर्म स्पिनर मिच सैंटनर ने भारत के मध्य क्रम के युवा तुर्कों के निपटा दिया. न्यूज़ीलैंड ने जैसा खेल दिखाया उससे वो विश्व कप जीत सकता है और भारत को अब चार साल इंतजार करने होंगे.

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